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पैसे की भूख और कुत्तों की दुम इंसान की समझ से परे है

✍️ Written by Dheeraj Yadav 📅 Published 14 Sep 2026 🔄 Last updated 14 Sep 2026 ⏱ 1 min read

Quick Answer

पैसे की भूख और कुत्तों की दुम इंसान की समझ से परे है

पैसे की भूख और कुत्तों की दुम इंसान की समझ से परे है
जिन लोगों का उधार हमारे ऊपर था, उसे चुकाने के लिए हमने अपना घर तक बेच दिया। उस समय बस यही सोचा कि किसी का हक़ हमारे ऊपर नहीं रहना चाहिए।

आज जब हमें अपने ही पैसे की जरूरत पड़ी, तो परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बनीं कि हमें भी इंतज़ार और मजबूरियों को समझना पड़ा।

शिकायत पैसों से नहीं है… बस दिल में एक बात रह गई है कि **हमने उनकी जरूरत के समय अपनी मजबूरी नहीं देखी, काश हमारी जरूरत के समय हमारी मजबूरी भी थोड़ी समझ ली जाती।**

शायद जिंदगी इसी तरह इंसान और रिश्तों की असली अहमियत समझाती है।

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